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सुकरात के उद्धरण

मनुष्य अपनी हानि स्वयं आप ही करता है, अपने कार्यों द्वारा। दूसरा मनुष्य मेरी कोई हानि नहीं कर सकता। ईश्वर सज्जन पुरुष को दुर्जन द्वारा पीड़ित नहीं करा सकता।