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कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

मनुष्य अकेला पड़कर और अकेले की चिन्ता से हलकान होकर छोटी-छोटी घेरानों की रचना करने, उसमें सिमटने और घुटने को मज़बूर हो गया।