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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

मनोवेग या भावों को मंद या दूर करनेवाली स्मृति, अनुमान या बुद्धि आदि कोई दूसरी अंतःकरण-वृत्ति नहीं है, मन का दूसरा भाव या वेग ही है।