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उमर ख़य्याम के उद्धरण

मंदिर तथा मस्जिद दोनों ही ईश्वर-पूजा के स्थान हैं। शंख बजाना उसी की उपासना का गीत है। मस्जिद की महराब, गिरजाघर, माला व सलीब- यह सब उसी ईश्वर की पूजा के चिह्न हैं।