Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

मन में आलंबनों का मार्मिक ग्रहण, बिंबग्रहण के रूप में होता है—केवल अर्थग्रहण के रूप में नहीं।