कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण
मन के स्तर-स्तर पर मैल ज़मी हो और पर्व का आयोजन करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा हो तो पर्व ऐसे आयोजन से मुँह फेर लेता है।
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