महान् बनने के उपदेशों और उद्बोधनों से किसी का लाभ नहीं है। साधारण आदमी उनका पालन नहीं कर सकता। अगर पालन करने लगे, तो मज़े में उसकी ज़िंदगी बरबाद हो सकती है। और जिसे महान् होना ही है, वह महान् होने के लिए इन उपदेशों की राह नहीं देखेगा—उसे ख़ुद राह दिखती है।