श्यामसुंदर दास के उद्धरण
कुछ विद्वान भी, जो दार्शनिक रुचि के होते हैं अथवा जो मस्तिष्क की प्रबल शक्ति लेकर उत्पन्न होते हैं—पद्य के विपक्ष में गद्य को अधिक आदर देते हैं।
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