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विनोबा भावे के उद्धरण

किसी साहित्यिक ने अपनी कृति दुनिया के सामने रखी, तो उसका नाप-तौल उसके आकार से नहीं किया जाएगा। किसने कितना लिखा, इस पर से उसकी क़ीमत नहीं नापी जाएगी; बल्कि उसने जीवन को कितना रस दिया, उस पर से उसकी परीक्षा, पहचान होगी।