श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण
किसी चीज़ को 'आज समझ गया हूँ, फिर कल समझ में नहीं आती' पहेली इत्यादि कहकर शृगाल मत बनो। इतर जंतु भी जिसे समझ लेते हैं उसे भूलते नहीं। इसीलिए ऐसा बोलना ही दुष्ट या अस्थिर-बुद्धि का परिचायक है।
-
संबंधित विषय : चेतना