किसी भाषा का भाग्य उसे बरतने वाले समाज के भाग्य से जुड़ा होता है। यद्यपि भाषा किसी समाज की तस्वीर ही नहीं; तक़दीर और उसे प्रभावित करने वाली तरक़ीब भी होती है, पर समाज का चरित्र; उसकी संरचना और वे परिस्थितियाँ जो संरचना पर असर डालती है, भाषा के स्वास्थ्य और भविष्य की दिशा बनाती है।