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कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

कर्मकाण्ड मनुष्य की लोकयात्रा में अवरोध उत्पन्न करते हैं तब, जब जड़ शैली में मनुष्य उसे ढोने लगता है। मनुष्य पर कर्मकाँड हावी हो जाता है और मानवीय संवेदना उसक नीचे दब जाती है।