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मैनेजर पांडेय के उद्धरण

कालिदास के काव्य में विरह का संतुलित रूप वर्तमान है। उनका मेघदूत तो पुरूष की विरह-व्याकुल मनोदशा एवं भावोच्छ्वास का ललित निदर्शन हैं।