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वात्स्यायन के उद्धरण

जो पुरुष नवविवाहिता कन्या के मनोभावों को समझता है, बिना सहसा (बलात) उपसर्पण (संभोग करने की चेष्टा) करता है—उससे कन्या भयभीत, त्रसित और उद्विग्न रूप से द्वेष करने लगती है।