जो कुछ मुझे आज ऐसा धर्म, न्याय और योग्य प्रतीत होता है कि जिसे करते, स्वीकारते या प्रकट करते मुझे संकोच होनेवाला नहीं है, जिसे मुझे करना ही चाहिए, और जिसे न करने पर मेरे लिए मान सहित जीना असंभव हो, वह मेरे लिए सत्य है। वही मेरे लिए परमेश्वर का सगुण स्वरूप हैं।