आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण
जो केवल प्रफुल्लप्रसूनप्रसार के सौरभ-संचार, मकरंदलोलुपधुपगुंजार, कोकिलकूजित निकुंज और शीतल सुखस्पर्श समीर इत्यादि की ही चर्चा किया करते हैं, वे विषयी भोगलिप्सु हैं।
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