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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

जीवन के प्रति व्यंग्यकार की उतनी ही निष्ठा होती है; जितनी गंभीर रचनाकार की, बल्कि ज़्यादा ही। वह जीवन के प्रति दायित्व का अनुभव करता है।