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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

जनमानस में एकता उत्पन्न करने वाली भाषा तब विभेद पैदा करती है, जब वह राजनैतिक और सांप्रदायिक पैंतरेबाजी के काम में लाई जाती है।