विनोबा भावे के उद्धरण
जहाँ मनुष्य अस्पष्टरूप में सोचता है, वहाँ बहुत ज़्यादा सोचता है। जहाँ स्पष्ट सोचता है, वहाँ विशिष्टता आ जाती है और व्यापकता कम हो जाती है।
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