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भर्तृहरि के उद्धरण

जब तक शरीर अपना पुष्ट और निरोग है और वृद्धावस्था दूर है, जब तक इंद्रियों की शक्ति क्षीण नहीं है और आयुष्य भी क्षीण नहीं हुआ है, तब तक बुद्धिमान पुरुष को उचित है कि अपने कल्याण का यत्न अच्छी भाँति से कर ले।