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वात्स्यायन के उद्धरण

जब संपुटक चुम्बन में रत नायक; अपनी जीभ से नायिका के दाँतों, तालु और जिह्वा को अच्छी तरह रगड़े, तो उसे 'जिह्वायुद्ध' कहते हैं।