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दुर्गा भागवत के उद्धरण

जब कोई रस से उत्पन्न सौंदर्य के अनुभव का आनंद लेता है, उसी क्षण 'संसार' विलीन हो जाता है।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर