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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

जब कबीर की सौ कविताओं का रवींद्रनाथ ने अँग्रेज़ी में अनुवाद किया और खुलेआम स्वीकार किया कि मैंने कबीर से बहुत-कुछ लिया है, तब कबीर को 'रिस्पेक्टेबिलिटी' मिली, क्योंकि रवींद्र आभिजात्य थे—दूसरा कोई ऐसा करता तब भी कबीर को प्रतिष्ठा न मिलती।