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भीमराव आंबेडकर के उद्धरण

इससे पहले कि मैं मर जाऊँ, मुझे अपने लोगों को एक निश्चित राजनीतिक दिशा देनी चाहिए। वे हमेशा ग़रीब, उत्पीड़ित वंचित रहे हैं। इसी कारण आज उनमें एक नई चेतना और नया आक्रोश जन्म ले रहा है।

अनुवाद : योगेंद्र दत्त