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विक्टर ई. फ्रैंकल के उद्धरण

हम यह नहीं मान सकते कि मनुष्य को आज़ादी की सोच से पूरी तरह दूर किया जा सकता है। यहाँ तक कि मनोरोगियों व पागलों के मामले में भी कहीं आज़ादी का अंश पाया जाता है, भले ही वह कितनी भी सीमित ही क्यों न हो। दरअसल रोगी के व्यक्तित्व के आंतरिक अंश को तो पागलपन छू तक नहीं पाता।

अनुवाद : रचना भोला 'यामिनी'