Font by Mehr Nastaliq Web

भामह के उद्धरण

हे धैर्यशील! रमणीय भोगों में भी तुम्हारी बुद्धि आसक्त्त नहीं होती। ये रमणियों से संबद्ध भोग (ऐंद्रिक आनंद) मुनियों का भी मन हर लेते हैं, अर्थात् उन्हें भी साधना—पथ से विमुख कर देते हैं, लेकिन तुम उनमें भी नहीं रमते।

अनुवाद : रामानंद शर्मा