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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

हर युग के भूत से वर्तमान की कुश्ती हुई है। कालिदास की अवहेलना जब केवल उनकी नवीनता के कारण होने लगी, तो उन्हें ललकारना पड़ा कि जो पुराना है, वही श्रेष्ठ नहीं है।