विनोद कुमार शुक्ल के उद्धरण
हर घर में आड़ बनी होगी, ताकि लोग छुप सकें। छुपने की कला और सभ्यता होगी। एक समाज होगा और छुपते-छुपाते लोगों का शासन।
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