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उमर ख़य्याम के उद्धरण

हक़ीक़त (भगवान) के भेद पूछने से ज्ञात नहीं हो सकते और न धन-दौलत व्यय करने से ही। जब तक तपस्या में 50 वर्ष तक अपनी जान को नहीं पाएगा और अपना रक्त स्वयं नहीं पिएगा, तब तक यह तेरा शरीर वहाँ तक नहीं पहुँच सकता।