Font by Mehr Nastaliq Web

जौन एलिया के उद्धरण

हमें रोज़-मर्रा की ज़िंदगी में न किसी फ़लसफी की ज़रूरत पेश आती है, न किसी शाइर की… फिर समाज उनकी हैसियत को भला किसलिए तस्लीम करे।