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महादेवी वर्मा के उद्धरण

हमारी बुद्धि-वृत्ति बाहर के स्थूलतम बिंदु से लेकर भीतर के सूक्ष्मतम बिंदु तक जीवन को एक अर्धवृत्त में घेर सकती है, परंतु दूसरा अर्धवृत्त बनाने के लिए हमारी रागात्मिका वृत्ति ही अपेक्षित रहेगी।