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भीमराव आंबेडकर के उद्धरण

हमारा मक़सद है मुक्ति पाना। फ़िलहाल हमारी और कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर हम धर्मांतरण से मुक्ति पा सकते हैं, तो हम हिंदू धर्म में सुधार की ज़िम्मेदारी क्यों ढोते रहें। हम अपनी ऊर्जा, समय, श्रम और धन इस पर क्यों नष्ट करे?

अनुवाद : योगेंद्र दत्त