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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

हल्की फ़िल्म और हल्का साहित्य चला है। अच्छी फ़िल्में फेल होती हैं, अच्छा साहित्य अलमारियों में रखा रहता है। परिणाम यह है कि हिंदी का लेखक वास्तव में भूखा मरता है।