श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण
गुरु को अपना समझना चाहिए—माँ, बाप, पुत्र इत्यादि घर के लोगों का ख़्याल करते समय जिससे उनका चेहरा भी याद आए।
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