एक क़िस्म के नेता होते हैं—'ख़ानदानी नेता।' ख़ानदानी पटवारी, ख़ानदानी पुरोहित की तरह ये भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी होते जाते हैं। पटवारी का बेटा 'ख़सरा-जमाबंदी' सीख लेता है और बाप की जगह संभाल लेता है। पंडित का बेटा संकल्प का मंत्र और सत्यनारायण की कथा सीखकर बाप के यजमानों को सँभाल लेता है। हमारे यहाँ नेता पिता का बेटा नेता हो जाता है।