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विनोबा भावे के उद्धरण

दीखने में जो होता है, प्रकट होता है; उससे न दीखने में जो होता है, वह बहुत बड़ा होता है। साहित्य दीखता नहीं। उसका जितना सूक्ष्म चिंतन करेंगे, उतना वह हमें व्यापक दर्शन देगा।