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नामवर सिंह के उद्धरण

छायावाद व्यक्तिवाद की कविता है, जिसका आरंभ व्यक्ति के महत्व को स्वीकार करने और करवाने से हुआ, किंतु पर्यवसान संसार और व्यक्ति की स्थायी शत्रुता में हुआ।