विनोबा भावे के उद्धरण
ब्रह्मांड में जो है; वह सब तो साहित्यिकों की वाणी में आता ही है, परंतु जो ब्रह्मांड में नहीं है—वह भी साहित्यिकों की वाणी में आता है।
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