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महात्मा गांधी के उद्धरण

ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल वीर्य रक्षा अथवा कामजय मात्र ही नहीं है, बल्कि इसमें सभी इंद्रियों का संयम आवश्यक है।