मृदुला गर्ग के उद्धरण
भावुक इंसान मोह में फंसता है और बाहर निकल आता है। फिर या बार-बार फँसता-निकलता रहता है या पूरी तरह व्यावहारिक बनकर मोह करना भी छोड़ देता है; आत्म-तुष्ट भाव से गृहस्थी चलाता है और प्रेम के नकारापन पर उपदेश देता है।
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