Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

भाव के विषय का कैसा ही यथातथ्य चित्रण क्यों न हो, यदि उसके वर्णन के अंतर्गत ही उक्त भाव को शब्द और चेष्टा द्वारा प्रकट करनेवाला न होगा, तो (शास्त्रीय दृष्टि से) रस कच्चा ही समझा जाएगा।