नामवर सिंह के उद्धरण
भक्ति का मूल अर्थ ही है डूब जाना, डुबा देना—भगवान में और भगवानमयी विश्व में। यह डूबने वाला जो भाव है, एक नया पोयटिक्स है। इस नये पोयटिक्स का निर्माण भक्तों ने किया, जिसका एक रूप ऐन्द्रियता है।
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