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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

भक्त धर्म के शासन पक्ष और शास्त्र पक्ष का अवलंबन न करके उसके हृदय पक्ष का अवलंबन करता है, वह धर्म के भय का प्रचार नहीं करता; धर्म की उपयोगिता का प्रचार नहीं करता—भक्ति का प्रचार करता है, जिससे हृदय धर्ममय हो जाता है।