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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

भारत के सभी समाज-सुधारकों ने; पुरोहितों के अत्याचारों और अवनति का उत्तरदायित्व, धर्म के मत्थे मढ़ने की एक भयंकर भूल की और एक अभेद्य गढ़ को ढहाने का प्रयत्न किया।