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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

भारत और अन्य सभी स्थानों में द्वैतवाद की शिक्षा देना एक बहुत बड़ी भूल थी; क्योंकि उससे लोग चरम तत्त्वों की ओर ध्यान न देकर, केवल प्रणाली से ही उलझे रहे और वह प्रणाली सचमुच बड़ी जटिल थी।