बर्बरता तथा सभ्यता; दोनों ही परिस्थितियों में मनुष्य अपने सुख के साधन चाहता है। अंतर केवल यही है कि एक स्थिति में अपने सुख के साधन प्राप्त करना, व्यक्ति की शक्ति पर निर्भर है और दूसरी में सुख की सामग्री के समान विभाजन का अधिकार समाज को सौंप दिया जाता है।