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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

अत्याचार द्वारा उपस्थित घोर विघ्नबाधा की दशा में, प्रेमपात्र की भी रक्षा का सीधा लगाव प्रेम से नहीं रहता, करुणा से रहता है।