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महात्मा गांधी के उद्धरण

अस्तेय का अर्थ दूसरे के स्वामित्ववाली वस्तु का न लेना भर ही नहीं है। अपनी मानी जाती हो, पर अपने को उसकी ज़रूरत न हो, तथापि उसका उपयोग करना भी चोरी ही है।