स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण
असली वेदांत दर्शन विशिष्टाद्वैत से प्रारंभ होता है। इस संप्रदाय का कहना है कि कार्य कभी कारण से भिन्न नहीं होता। कारण ही परिवर्तित रूप में कार्य बनकर आता है।
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