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श्रीलाल शुक्ल के उद्धरण

अपने यहाँ गंध ही देसी शराब का विज्ञापन है। इसीलिए अच्छे-ख़ासे अख़बारों में विलायती शराब के विज्ञापन तो मिल जाते हैं, देसी शराब का ज़िक्र नहीं आता। उसके विज्ञापन की ज़रूरत नहीं है।